आईएएस बनने के लिए कितनी रैंक चाहिए? | IAS banne ke liye kitni rank chahiye

दोस्तों सरकारी नौकरी के महत्व के बारे में तो हम सब जानते हैं, पर जब बात आती है कि सरकारी नौकरी में भी सबसे अच्छी यानी सबसे ऊंचे पद की और सबसे प्रतिष्ठित नौकरी कौन-सी है तो इसमें एक आईएएस अधिकारी का नाम भी सबसे पहले नामों में आता है। 

वर्तमान में लाखों विद्यार्थियों का सपना भविष्य में एक आईएएस ऑफिसर बनने का होता है, और उसके लिए वे सालों से इसकी परीक्षा की तैयारी भी करते हैं।

जो विद्यार्थी आईएएस का सपना देखते हैं उन्हें इतना तो पता होता ही है कि इसके लिए यूपीएससी की परीक्षा पास करनी होती है।

पर बहुत से विद्यार्थियों के मन में इस बात को लेकर कन्फ्यूजन होता है, कि आईएएस बनने के लिए कितनी रैंक चाहिए?

आईएएस बनने के लिए कितनी रैंक चाहिए?

आज यहां इस आर्टिकल में हम बात करेंगे कि आईएएस बनने के लिए कितना रैंक आना चाहिए?

Civil services में जिन विद्यार्थियों का सपना आईएएस के रूप में चयनित होने का होता है उन्हें कितने रैंक के अंदर आना होता है?

IAS के लिए कितना rank आना जरूरी है?

असल में आईएएस बनने के लिए कितना रैंक आना चाहिए, इसके सही जवाब के लिए यूपीएससी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया को अच्छे से समझना होगा, और इसके बारे में हम आगे समझेंगे भी।

अलग-अलग वर्गो में कितने रैंक तक के विद्यार्थी आईएएस बनेंगे यह कई बातों पर निर्भर करता है।

पर यदि पहले एक औसत के तौर पर बात करें तो सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को आईएएस बनने के लिए कम से कम 90 रैंक के अंदर आना चाहिए, ओबीसी और उसके साथ EWS वर्ग के विद्यार्थियों को आईएएस बनने के लिए कम से कम 300 rank के अंदर आना चाहिए।

और वही यदि sc/st वर्ग के विद्यार्थियों को आईएएस के रूप में चयनित होना है तो उन्हें 450 के अंदर रैंक लाना होगा।

हम यहां यूपीएससी की परीक्षा की बात कर रहे हैं, इसलिए यूपीएससी की परीक्षा में यह रैंक किस तरह निर्धारित होते हैं, इसकी पूरी प्रक्रिया को अच्छे से समझना जरूरी है।

तो अब हम इसी को अच्छे से समझते हैं।

UPSC में रैंक कैसे तय होता है?

रैंक तय होने की प्रक्रिया को समझने के लिए थोड़ा सा यूपीएससी के बारे में बात कर लेते हैं।

यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन ऑफ इंडिया हर वर्ष सिविल सर्विसेज की परीक्षा लेता है जिसके माध्यम से आईएएस और आईपीएस जैसे कुल 24 सर्विसेस में उम्मीदवारों की नियुक्ति होती है।

यूपीएससी के services अंतर्गत दो तरह के categories आती हैं।

पहला ऑल इंडिया सर्विसेज और दूसरा सेंट्रल सर्विसेज।

ऑल इंडिया services में आईएएस और आईपीएस पदों पर नियुक्ति होती है जिन्हें राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों का कैडर दिया जाता है।

बाकी में IFS, IRS और इस तरह के ग्रुप ए और बी की दूसरी सर्विसेज आती है। पर हम यहां सिर्फ आईएस पर ही फोकस करेंगे।

अब बात करें यूपीएससी की परीक्षा की तो यह 3 चरणों में होती है, जिसमें prelims फिर mains और अंत में साक्षात्कार यानी इंटरव्यू होता है। 

UPSC prelims – (preliminary exam)

इसमें दो-दो घंटे के दो पेपर होते हैं।

पहला paper general studies का होता है, जिसके अंको के आधार पर cut off तैयार होता है, cut off पार करने वाले उम्मीदवार ही आगे की परीक्षा में बैठ सकते हैं।

दूसरा पेपर CSAT, qualifying paper होता है, यानी कि इसमें सिर्फ 33% अंक लाने से उम्मीदवार का काम चल जाता है।

जैसे 200 नंबर के paper में 67 नंबर लाना ज़रूरी होता है। 

ध्यान देने वाली बात यह है कि पहले पेपर में अगर उम्मीदवार ने कट ऑफ क्लियर किया है, लेकिन सेकंड पेपर में  क्वालीफाई नंबर नहीं लाए तो प्रीलिम्स क्लियर नहीं माना जाएगा।

2 shifts में prelims के दोनों पेपर होते हैं।

UPSC mains – 

प्रीलिम्स पास कर लेने के बाद उम्मीदवार मेंस की परीक्षा में बैठ सकते हैं।

और यूपीएससी की असली लिखित परीक्षा आप इसी को कह सकते हैं। क्योंकि यह असल में prelims से कठिन होता है।

Mains में कुल मिलाकर के 9 पेपर देने होते हैं। सबसे पहले दो पेपर लैंग्वेज( eng + Indian/regional language) के होते हैं।

जो कि क्वालीफाइंग पेपर होते हैं। यानी वही 33% अंक ही लाने होते हैं। इस पेपर के अंक मेरिट लिस्ट बनाने में नहीं गिने जाते। 

इसके बाद एक निबंध यानी essay का पेपर होता है। इसमें भी तीन घंटे में दो निबंध लिखने होते हैं।

इन दोनों ही निबंधों को लिखने के लिए अलग-अलग टॉपिक मिलते हैं, जिन का चुनाव आप अपने हिसाब से कर सकते हैं। 

फिर होते हैं 3-3 घंटो के general studies के चार पेपर। एक दिन में maximum दो papers लिए जाते हैं।

इसके बाद आता है optional papers (वैकल्पिक विषय)। इसमें paper l और paper ll होते हैं।

Optional papers का चुनाव विद्यार्थी अपने हिसाब से कर सकते हैं, जिसमें भी वो अच्छे हों।

इस तरह से कुल 9 पेपर होते हैं। लैंग्वेज पेपर को छोड़कर बाकी सारे papers के अंक मेरिट लिस्ट तैयार करने के समय जोड़े जाते हैं।

और इन सब के बाद आता है इंटरव्यू। बहुत से उम्मीदवार इंटरव्यू को ही सबसे कठिन चरण मानते हैं। 

इसमें आपके दिए हुए जानकारी के हिसाब से इंटरव्यूअर जो खुद भी सिविल सर्विस के अधिकारी होते हैं, आप से प्रश्न पूछते हैं, और इस हिसाब से आपको पूरे नंबर में से अंक देते हैं।

प्रीलिम्स मैंस और इंटरव्यू तीनों के अंक जोड़कर फाइनल रिजल्ट तैयार होता है।

और हम जो इस आर्टिकल में rank निर्धारित करने के तरीके की बात कर रहे हैं, वह इसी से होता है।

Ranking तय होने की प्रक्रिया

ऊपर हमने जाना कि उम्मीदवार को इस तरह से यूपीएससी में नंबर लाने होते हैं। अब बात करें बैंक की तो सबसे पहले तो वैकेंसी पर निर्भर करता है।

मतलब उस साल कौन से  पोस्ट के लिए कितनी वैकेंसीज़ निकली हैं। और अलग-अलग कैटेगरी में candidates ने कौन-सा option चुना है। 

यहां option का मतलब है, कुछ उम्मीदवार पहले आईएएस को preference देते हैं, कुछ आईपीएस को तो कुछ आई एफ एस को।

और जाहिर है, कैटेगरी का मतलब है जनरल, SC,ST,OBC और EWS (यानी जो आर्थिक रूप से कमज़ोर कैटेगरी में आते हैं)।

जो भी उम्मीदवार यूपीएससी की परीक्षा देते हैं, वे mains exam की form भरते समय पहले ही अपनी प्रेफरेंस क्लियर कर देते हैं, कि उनकी पहली प्रेफरेंस IAS है या IFS या IPS।

प्री, मेंस और इंटरव्यू के अंको को जोड़कर फाइनल रिजल्ट निकलता है और फिर उसी हिसाब से सबसे ज्यादा नंबर लाने वाले IAS बनते हैं, अगर उनकी यही preference हो तो।

यदि कोई ज्यादा रैंक लाने वाला आईएएस नहीं चुनता है तो उसके बाद के रैंक वाले आईएएस बनते हैं। 

इसी तरह धीरे-धीरे घटते हुए मार्क्स के साथ IAS के बाद की posts मिलती जाती है।

जैसे कि अगर 100 पोस्ट्स की वैकेंसी है, और उसमें IAS के लिए 30 vacancies हैं, तो टॉप के 30 सभी लोगों को ही IAS मिलेगा

यह भी हो सकता है कि उन टॉप 30 लोगों में से कुछ उम्मीदवार कुछ और post prefer करते हों (जैसे IPS या IRS आदि)।

तो इस तरह से मेरिट में थोड़ा पीछे रहे लोग अगर अपना preference IAS रखते हैं, तो उन्हें यह पोस्ट मिल सकती है।

इस तरह कुछ पीछे के रैंक वाले candidate भी IAS पा सकते हैं।

उदाहरण के लिए 2018 के यूपीएससी रिजल्ट्स में, रिजल्ट्स अनाउंस होने तक 812 vacancies थीं, जनरल कैटेगरी में  IAS की पोस्ट मिलने वाले आखरी उम्मीदवार की रैंक 92 थी।

इसी तरह अगर सामान्य वर्ग में IAS के लिए 70 रिक्तियां हैं, तो टॉप के 90-95 तक के रैंक वाले भी सामान्य वर्ग में IAS पा सकते हैं।

इसी तरह OBC/EWS के लिए यह रैंक 300 और sc/st के लिए 450 तक जाती है।

Conclusion

ऊपर दिए गए इस आर्टिकल में हमने बात की, कि आईएएस बनने के लिए कितना रैंक चाहिए?

भविष्य में एक आईएएस ऑफिसर बन कर देश की सेवा करने का सपना बहुत से विद्यार्थियों का होता है, ऐसे में उनके लिए यह जरूरी है कि उन्हें आईएएस बनने की प्रक्रिया की हर बात की अच्छी से जानकारी हो।

और आईएएस बनने के लिए कितना रैंक लाना होता है, यह जानकारी भी उसी में से एक है।

Leave a Comment

Your email address will not be published.