कॉमर्स में कौन-कौन से सब्जेक्ट होते हैं? | कॉमर्स सब्जेक्ट | how many subject in commerce

दोस्तों इस लेख में हम कॉमर्स स्ट्रीम के विषयों की बात करेंगे, कॉमर्स में कितने सब्जेक्ट होते हैं? (commerce mein kitne subject hote hain), कॉमर्स स्ट्रीम के अंतर्गत किन सब्जेक्ट्स को पढ़ना होता है आदि।

इस तरह के सवाल कॉमर्स स्ट्रीम चुनने वाले या चुनने की सोचने वाले हर विद्यार्थी के मन में आ सकता है।

दोस्तों पढ़ाई के क्षेत्र में पढ़ने के लिए बहुत सारे विषय होते हैं। निचली कक्षाओं से हम सभी विषयों को एक साथ पढ़ते हैं, पर 10 वी के बाद हर विद्यार्थी को साइंस, कॉमर्स और आर्ट्स स्ट्रीम में से कोई एक चुनना होता है।

तीनों ही stream में अलग अलग विषयों की पढ़ाई होती है, और यहां हम कॉमर्स स्ट्रीम के अंदर आने वाले सब्जेक्ट की बात करने वाले हैं।

साइंस stream को सामान्यतः tough माना जाता है, ऐसे में जो विद्यार्थी साइंस नहीं लेते उनके पास दूसरा विकल्प commerce होता है, और सबसे अंत में arts तो है ही।

सबसे पहले संक्षिप्त में जान लेते हैं कि कॉमर्स क्या है, और उसके बाद कॉमर्स में आने वाले सभी विषयों की बात कर लेते हैं की commerce mein kaun kaun se subject hote hain.

Commerce में कितने विषय होते हैं? (Commerce Subject List In Hindi)

कॉमर्स में कौन-कौन से सब्जेक्ट होते हैं?

आसान भाषा में कहें तो जिस स्ट्रीम या जिन विषयों के अंतर्गत मुख्यत:  business से और finance से संबंधित चीजों की पढ़ाई की जाती है उसे ही कॉमर्स कहते हैं।

कॉमर्स सिर्फ इतना ही नहीं है, यह एक vast क्षेत्र है जिसके अंदर और बहुत सी चीजें आती है।

दूसरी तरह से कहा जाए तो शिक्षा की एक स्ट्रीम के रूप में कॉमर्स को व्यापार और व्यावसायिक गतिविधियों के अध्ययन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, जैसे कि उत्पादक से अंतिम उपभोक्ता तक वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान करना आदि।

छात्र यदि कॉमर्स स्ट्रीम का चुनाव करते हैं तो उन्हें खुद को अकाउंटेंसी, फाइनेंस, बिजनेस स्टडीज, बुककिपिंग, इकोनॉमिक्स आदि जैसे विषयों से परिचित कराना पड़ता है।

जिन छात्रों की देश विदेश की अर्थव्यवस्था, फाइनेंस और बैंकिंग और व्यापार जैसे क्षेत्रों में रुचि हो, वे commerce का चुनाव करते हैं।

कॉमर्स के अंतर्गत कुल जीतने विषय आते हैं, उनमें से कुछ कंपलसरी होते हैं जबकि कुछ  ऑप्शनल होते हैं जिन्हें छात्र अपनी इच्छा से चुन सकते हैं।

सारे विषय की सही जानकारी होने पर छात्र को चुनने में आसानी होती है। अब कॉमर्स के सारे विषयों के बारे में जान लेते हैं।

11वीं में कॉमर्स में कौन-कौन से सब्जेक्ट होते हैं? (Commerce Subjects In 11th)

यदि कॉमर्स के अंतर्गत आने वाले सभी विषयों की बात करें तो इसकी संख्या आठ है।

यानी कि कॉमर्स स्ट्रीम के अंतर्गत कुल आठ विषय आते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है कि 11वी और 12वी  में आपको उन आठों विषयों को पढ़ना होता है।

जिस तरह से साइंस में maths और biology बट जाता है, उसी प्रकार कॉमर्स में भी आपको 5 सब्जेक्ट ही पढ़ने होते हैं जिनका चुनाव आप कर सकते हैं।

Commerce के subjects (commerce subject in hindi)

  1. अर्थशास्त्र [ Economics ]
  2. फिजिकल एजुकेशन [ Physical Education ]
  3. एकाउंटेंसी [ Accountancy ]
  4. बिजनेस स्टडीज [ Business Studies ]
  5. इनफॉर्मेटिक्स प्रैक्टिसेज [ Informatics Practices ]
  6. मैथमेटिक्स [ Mathematics ]
  7. इंग्लिश [ English ]
  8. इंट्रप्रनरशिप [ Entrepreneurship ]

कक्षा 11वीं और 12वीं में कॉमर्स में पांच विषय अनिवार्य होते हैं जिनमें Accountancy, Business Studies, Economics, Mathematics/ Informatics Practices और इंगलिश है।

इन विषयों के अलावा entrepreneurship और  physical education optional subjects होते हैं।

अब इन आठों विषयों के बारे में एक-एक करके संक्षेप में जान लेते हैं।

कॉमर्स में 12 के बाद सरकारी नौकरी के बारे में जाने। इसे ज़रूर पढ़े।

1. Economics 

Commerce के इकोनॉमिक्स सब्जेक्ट में आपको भारत के साथ-साथ विदेश की भी अर्थव्यवस्था के बारे में जानकारी दी जाती है।

भारत की अर्थव्यवस्था कैसे काम करती है, अर्थव्यवस्था किसे कहा जाता है, इसे प्रभावित करने वाले घटक कौन कौन से होते हैं आदि।

आज के जीवन में अर्थव्यवस्था एक बहुत ही बड़ा पहलू है, इसलिए कॉमर्स में अर्थव्यवस्था के बारे में पढ़ाया जाता है।

अर्थव्यवस्था के आधार पर ही सरकार काम करती है, अर्थव्यवस्था पर प्रभाव डालने वाली चीजे हमारे दैनिक जीवन में भी प्रभाव डालती हैं।

अर्थव्यवस्था एक ऐसा सामाजिक विषय है जिसकी  जानकारी होना जरूरी है, इसकी जरूरत कभी भी पड़ सकती है।

Economics के अंतर्गत और भी कई सारी चीजें आती है।

दसवीं के बाद 11वीं और 12वीं में कॉमर्स के अंदर इकोनॉमिक्स होता है, और यही इकोनॉमिक्स आप 12वीं के बाद ग्रेजुएशन में यदि बीकॉम करते हैं तो उसमें भी पढ़ना होता है।

इकोनॉमिक्स एक रोचक विषय भी है, असल में निचली कक्षाओं से ही हम सामाजिक विज्ञान के साथ मिलाकर इसे पढ़ते हैं।

higher classes में जाकर इसका एरिया vast होने के कारण इसे अलग विषय के रूप में पढ़ना होता है। यह कॉमर्स के सबसे लोकप्रिय विषयों में भी आता है।

2. Physical Education 

फिजिकल एजुकेशन के बारे में काफी लोगों को पता होता है, इसका मतलब शारीरिक शिक्षा होता है, जो थ्योरी से ज्यादा प्रैक्टिकल की चीज है।

Commerce में physical education compulsory subject नहीं होता है, यह ऑप्शनल के तौर पर रहता है, यदि छात्र चाहे तो उसे ले सकते हैं या नहीं भी। पर कॉमर्स में दूसरे विषयों के साथ फिजिकल एजुकेशन लेना सही ही रहता है क्योंकि यह 12वीं में आपके नंबर बढ़ाने का काम कर सकता है।

ऐसा नहीं है कि फिजिकल एजुकेशन में बिल्कुल भी थ्योरी नहीं होता, यदि आप इसे लेते हैं तो आपको दूसरे विषयों की तरह इसका थ्योरी पेपर भी देना होता है।

साथ में प्रैक्टिकल के मार्क्स भी रहते हैं, जो आपका स्कूल का टीचर आपको देता है, और इसमें आपको फायदा हो सकता है।

बात करें फिजिकल एजुकेशन के बारे में तो इसमें शारीरिक एक्सरसाइज से लेकर योग और व्यायाम आदि तक सब कुछ सिखाया जाता है, जो शरीर को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी है।

इसके अंतर्गत आपको सारे जरूरी खेलों के नियम और measurements आदि के बारे में भी विस्तार से पढ़ाया जाता है।

3. Accountancy 

विषय के नाम से पता चल ही रहा है कि इसमें accounts से संबंधित पढ़ाई कराई जाती है।

यह सब्जेक्ट आपको अकाउंट के बारे में ज्ञान प्राप्त करने के लिए सिखाया जाता है, जैसे कि अगर आप किसी कंपनी में काम करना चाहते हैं तो आपको Accountancy आना जरूरी है, क्योंकि कंपनी में अकाउंट के मेंटेनेंस का काम रहता है।

इसी कारण आपको अकाउंटेंसी सिखाया जाता है, Accountancy सिख कर आप किसी  कंपनी का पिछले साल का प्रॉफिट या लॉस, इस साल का प्रॉफिट या लॉस या दोनों साल का प्रॉफिट आदि निकालकर पिछले साल कितना नुकसान या फायदा हुआ है आदि निकाल सकते हैं।

अगर आप Accountancy subject को अच्छे से सीखते हैं, तो आपको किसी भी कंपनी में अकाउंटेंट की जॉब आसनी से लग सकती है, अकाउंट की जानकारी आपको किसी भी बिजनेस को बढ़ाने में मदद करता है।

एकाउंटिंग के अंदर आपको लेन-देन का हिसाब और उसका मेंटेनेंस देखना होता है। किसी भी व्यापार के लिए यह बहुत ही जरूरी होता है कि उसका एकाउंटिंग डिपार्टमेंट सही तरीके से managed हो।

चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे जॉब्स कॉमर्स की फील्ड में सबसे प्रतिष्ठित जॉब प्रोफाइल्स में से है, और किसके नाम में भी अकाउंटेंट है, जिससे पता चलता है कि अकाउंटेंसी कॉमर्स का एक बहुत ही मुख्य सब्जेक्ट है, इसकी सही तरीके से पढ़ाई करना जरूरी होता है।

4. Business Studies 

कॉमर्स के अंदर आने वाला है यह विषय मुख्य तौर पर व्यापार से संबंधित है। Business studies के अंतर्गत बिजनेस के बारे में जानकारी दी जाती है।

आपको बताया जाता है कि किसी भी बिजनेस की शुरुआत किस तरह से करनी चाहिए, एक बिजनेस के लिए कई सारी चीजों की जरूरत पड़ती है, जैसे कि बिजनेस शुरू करने के लिए फंडिंग कहां से लाएं, अपने बिजनेस की मार्केटिंग किस तरह से करनी चाहिए, व्यापार को मैनेज करना और इस तरह की और भी कई बातें बिजनेस स्टडीज में सिखाई जाती है।

यदि आपकी रूचि व्यापार में है तो आपको यह विषय काफी ध्यान से पढ़ना चाहिए जिससे आपकी बिजनेस की समझ विकसित हो सके।

अपने बिजनेस को बड़ा करने की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है, उदाहरण के लिए, शुरुआत में यदि आपके पास कोई छोटी किराने की दुकान हो तो समय के साथ आप उस दुकान को किस तरह से बढ़ा सकते हैं, किस तरह से उसे एक बड़े होलसेल शॉप में विकसित कर सकते हैं, इस तरह की जानकारी आपको बिजनेस स्टडीज में दी जाती है। 

5. Informatics Practices 

कॉमर्स का यह सब्जेक्ट एक ऐसा विषय है जहां पर आपको दुनिया में चल रही लेटेस्ट टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर के बारे में जानकारी दी जाती है।

इस subject में आपको कोई सॉफ्टवेयर कैसे बनाया जाता है, उसे कैसे यूज़ किया जाता है, यह चीजें हमारे जीवन में किस तरह असर डालती है आदि जैसी चीजों के बारे में पढ़ाया जाता है।

बेसिकली यह सकते हैं, कि इंफॉर्मेशन प्रैक्टिस कंप्यूटर और तकनीक के क्षेत्र से संबंधित विषय है।

आजकल बहुत से विद्यार्थियों की कंप्यूटर में विशेष रूचि होती है, उनके लिए यह एक अच्छा विषय हो सकता है।

इसमें आप सीखते हैं कि कोई भी कंप्यूटर सॉफ्टवेयर किस कंप्यूटर लैंग्वेज से बनता है, अलग-अलग कंप्यूटर लैंग्वेजेस कौन से हैं, कंप्यूटर लैंग्वेज कैसे काम करता है आदि।

इसमें आपको डिजिटल मार्केटिंग, एफिलिएट मार्केटिंग, प्लैनिंग, सेल्स, मार्केटिंग आदि के बारे में भी जानकारी दी जाती है।

जिसे भी इंटरनेट चलाना और नई नई टेक्नोलॉजी और सॉफ्टवेयर के बारे में सीखना अच्छा लगता हो, उनके लिए यह विषय बहुत ही अच्छा है, यहां विद्यार्थी को दुनिया में चल रही लेटेस्ट कम्प्यूटर लैंग्वेज और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी के बारे में सिखाया जाता है।

6. Mathematics 

जिन विद्यार्थियों का ऐसा लगता है की गणित की पढ़ाई दसवीं के बाद सिर्फ साइंस स्ट्रीम में ही करनी होती है, वे गलत होते हैं, यदि आप कॉमर्स लेते हैं तो भी इसमें आपको गणित की पढ़ाई करनी होती है।

बहुत से लोगों को मैथमेटिक्स सब्जेक्ट पसंद नहीं आता, लेकिन अगर आपने कॉमर्स फील्ड ले ली है तो आपको मैथमेटिक्स आना  जरूरी है।

हालांकि जिन्हें यह विषय बिल्कुल भी पसंद नहीं उनके लिए राहत की बात यह है कि गणित कॉमर्स में ऑप्शनल सब्जेक्ट होता है, यदि आप गणित नहीं लेना चाहते तो इसकी जगह आपके पास दूसरा विकल्प भी होता है। 

कॉमर्स के अंतर्गत जो गणित पढ़ाया जाता है वह मुख्य तौर से एकाउंटिंग और बैंकिंग और फाइनेंस आदि से संबंधित होता है, जिसमें की हिसाब किताब, प्रॉफिट लॉस, मूलधन ब्याज, statistics और इस तरह के टॉपिक्स ज्यादा रहते हैं।

गणित के बाकी दूसरे टॉपिक्स आपको इसमें ज्यादा पढ़ने नहीं होते। क्योंकि कॉमर्स के अंदर मुख्यत: इन्हीं fields से संबंधित कार्य करने होते हैं। 

7. English 

वैसे भी इंग्लिश आज के समय में हर क्षेत्र में एक इंपॉर्टेंट विषय बन चुका है, इंग्लिश का इस्तेमाल लगभग हर जगह ही होता है।

इंग्लिश कॉमर्स का एक मैन सब्जेक्ट है, जो आपको 11th में भी पढ़ाया जाता है और 12th में भी ।

आजकल अंग्रेजी का सही ज्ञान होना वैसे भी जरूरी है, अगर आप भी अच्छे से इंग्लिश सीखना चाहते हैं, तो आपको इस विषय को बारीकी से सीखना जरूरी है।

यदि कॉमर्स स्ट्रीम की बात छोड़ भी दें तो अगर आपको कोई भी अच्छी सी जॉब करनी है तो आपको अच्छी इंग्लिश बोलना आना बहुत ही जरूरी है।

इसके अलावा कहीं ना कहीं अंग्रेजी शिक्षा के स्तर को भी दर्शाता है।

अगर आपको अच्छी इंग्लिश बोलना और लिखना आता है तो आपको कहीं पर भी अच्छी जॉब मिल सकती है।

इंग्लिश विषय के अंतर्गत आपको इंग्लिश लिटरेचर और इंग्लिश लैंग्वेज दोनों ही चीजें पढ़नी होती है।

हर किसी को इंग्लिश ग्रामर का सही इस्तेमाल आना चाहिए, बहुत से ऐसे जॉब्स हैं जिनके लिए english must required रहता है।

8. Entrepreneurship

आज के समय में आपने स्टार्ट अप जैसे शब्द के बारे में सुना होगा। इसे ही आप एंटरप्रेन्योरशिप के तौर पर समझ सकते हैं।

कॉमर्स के अंतर्गत यह विषय भी आता है जो कि बिजनेस स्टडीज से थोड़ा अलग होता है। इस विषय के अंतर्गत मुख्य तौर पर एंटरप्रेन्योरशिप के बारे में ही अध्ययन कराया जाता है।

आज के समय में बिजनेस के ऑप्शंस कई सारे हैं पर उनके लिए जानकारी का अभाव है।

एक अच्छा स्टार्टअप करने के लिए नए और इनोवेटिव आइडियाज की जरूरत होती है, एंटरप्रेन्योरशिप के अंतर्गत इन्हीं चीजों के बारे में सिखाया जाता है।

Technology के बढ़ते इस्तेमाल के साथ ऑनलाइन बिजनेस के भी बहुत से मौके मौजूद हैं,  बस इसमें सही जानकारी के साथ आगे बढ़ने की जरूरत होती है। 

एंटरप्रेन्योरशिप इन्हीं सब के बारे में है, यह विद्यार्थियों को बिजनेस में सफल बनाने का कार्य करता है।

Conclusion

यहां इस आर्टिकल में हमने कॉमर्स के subjects के बारे में जाना। यदि आपने चार्टर्ड अकाउंटेंट के बारे में सुना होगा तो जिन विद्यार्थियों का लक्ष्य चार्टर्ड अकाउंटेंट होता है वे 12वीं के बाद कॉमर्स स्ट्रीम को ही चुनते हैं।

जैसे विद्यार्थी दसवीं पास करके कॉमर्स स्ट्रीम चुनने का निर्णय ले लेते हैं, उनके लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे कॉमस के अंतर्गत आने वाले सभी विषयों की जानकारी प्राप्त कर लें।

क्योंकि कक्षा 11वीं और 12वीं में आपको इन्हीं विषयों की पढ़ाई करनी होती है। और आगे की पढ़ाई के लिए भी यह जरूरी है।

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