कोर्ट मैरिज की फीस कितनी है? | Court marriage ki fees kitni hai

दोस्तों इस आर्टिकल में हम जानेंगे की कोर्ट मैरिज की फीस कितनी है? कोर्ट मैरिज करने में कितनी फीस लगती है?

दोस्तों शादी-विवाह हर किसी के जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग है, और क्योंकि भारत विविधताओं का देश है इसीलिए शादी विवाह की रीति-रिवाजे भी यहां अलग अलग हैं।

और इसी कारण कई बार अलग caste के होने के कारण इच्छुक युवक और युवती शादी नहीं कर पाते।

पर अगर दोनों की उम्र सही है तो देश के संविधान के अनुसार वे बिना किसी दिक्कत की शादी कर सकते हैं, वे court marriage कर सकते हैं। 

आपने भी कोर्ट मैरिज के बारे में कभी जरूर सुना होगा। इससे संबंधित एक बहुत कॉमन सवाल कई लोगों के मन में आता है की कोर्ट मैरिज की फीस कितनी होती है?

कोर्ट मैरिज की फीस कितनी है?

यानी कोर्ट मैरिज करने में कितना खर्च आ सकता है? और आज इस आर्टिकल में हम मुख्यत: इसी की बात करेंगे।

जानेंगे कोर्ट मैरिज कितने खर्च में और कैसे किया जा सकता है इसके लिए किन चीजों की जरूरत पड़ती है आदि।

Court marriage में लगने वाली फीस

Fees के बारे में जानने से पहले थोड़ा संक्षिप्त में कोर्ट मैरिज की बात कर लेते हैं। 

आम तौर पर तो लोग शादी आपने धर्म या Community के रीती-रिवाज के अनुसार ही करते हैं। Court marriage पारंपरिक शादियों से अलग होता है। 

Court Marriage बिना किसी पारंपरिक समारोह के marriage officer के समक्ष अदालत में होते हैं। 

सभी न्यायिक विवाह The Special  Marriage Act, 1954 के तहत संपन्न होते हैं। 

न्यायिक विवाह किसी भी धर्म, संप्रदाय के पुरुष और वयस्क महिला के बीच हो सकता है। 

Foreign citizen और एक भारतीय के बीच भी न्यायिक विवाह हो सकता है। 

इसमें किसी भी प्रकार की धार्मिक प्रथाओं का पालन नहीं किया जाता है। ऐसा करने के लिए, दोनों पक्षों को सीधे marriage registry में जाना होता है।

Mainly, अगर शादी के लिए अगर किसी पक्ष का माँ-बाप या कोई रिश्तेदार सहमत नहीं हो तो Court Marriage उस युगल को शादी करने के लिए अनुमति देती है।

कोर्ट मैरिज के लिए लगने वाली Fees की बात करें तो इस विवाह के पंजीकरण की फीस जगह-जगह अलग-अलग होती है। 

On average देखें तो तकनीकी रूप से यह फीस 1,000 रुपये से कम ही रहती है। 

कोर्ट में शादी करने के लिए कोई ज्यादा फीस नहीं देनी होती है, आप जो फीस देते हैं वह रजिस्ट्रेशन आदि के लिए लिया जा सकता है।

इसके इलवा औपचारिकताएं, कागजी कार्रवाई आदि पूरी करने में आप अपनी सहायता के लिए एक वकील ढूंढ सकते हैं, जो आपसे 5-10 हजार का फीस चार्ज करते है, लेकिन  यह कोई जरूरी खर्च नहीं है।

यदि आपको लगता है कि आप सब कुछ खुद ही मेंटेन कर सकते हैं तो वकील आदि की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

Court marriage के लिए जरूरी documents

क्योंकि court marriage official काम की तरह हो जाता है इसीलिए इसके लिए कुछ जरूरी required documents चाहिए होते हैं।

जो भी जोड़ा कोर्ट में शादी करना चाहता है, उनके लिए लड़के और लड़की दोनों का मौजूद होना तो अनिवार्य है ही, इसके साथ ही लड़की की उम्र 18 साल या उससे ज्यादा और लड़के की उम्र 21 साल या उससे ज्यादा  होनी ही चाहिए। 

Documents में, Court Marriage करने के लिए आपको अपने (लड़के और लड़की दोनों के) कई डाक्यूमेंट्स देने होते हैं। ये डाक्यूमेंट्स निम्नलिखित हैं-

1. वर और वधू के चार पासपोर्ट साइज फोटो।

2. दोनो के पते और पहचान का प्रमाण। (आधार Card)

3. उम्र के प्रमाण के रूप में जन्म प्रमाण पत्र (या 10वीं की     मार्क शीट भी मान्य होती है)

4. इकरारनामा कि लड़के और लड़की में से कोई भी किसी भी अवैध संबंध में शामिल नहीं है।

5. यदि लड़का और लड़की में से कोई तलाकशुदा है तो उस मामले में तलाक का आदेश और विधवा के मामले में पूर्व पति का मृत्यु प्रमाण पत्र।

6. कोर्ट मैरिज के लिए 3 गवाह भी लगते हैं, गवाहों की फोटो और पैन आईडी।

7. पहचान के लिए ड्राइविंग लाइसेंस आदि भी लग सकते हैं।

Court marriage की प्रक्रिया step by step

Step 1-  File Application For Court Marriage 

कोर्ट मैरिज करने के लिए आपको पहले जिला विवाह अधिकारी को सूचित करना होता है, कोर्ट मैरिज एप्लीकेशन लिखत में दोनों लड़का लड़की की तरफ से लिखा जाना चहिए।

एक और जरूरी बात कि युवक-युवती जिस जिले में शादी करना चाहती रहे हैं, वहां वे 30 दिन से अधिक निवास कर चुके हों।

Court Marriage Apply करने के लिए आपको ज़रूरी documents साथ में आत्ताच करने है। आयु का प्रमाण पत्र और निवास का प्रमाण पत्र संलग्न किया हुआ होना चाहिए। गवाह तो अनिवार्य होते ही हैं।

Step 2- Court Marriage Notice Period 

जिस marriage officer के पास अपने कोर्ट मैरिज रजिस्टर के लिए आवेदन किया है, वह शादी का नोटिस निकलता है, यह कोर्ट मैरिज नोटिस वहां के office के नोटिस बोर्ड पर लगता है। इसके इलावा स्थानीय अख़बार में भी court marriage का नोटिस छापा जाता है।

नोटिस की एक प्रति कार्यालय में एक निजी स्थान पर पोस्ट की जाती है, और दूसरी प्रति कार्यालय में वहां पोस्ट की जाती है, जहां दोनों पक्ष स्थायी रूप से रहते हैं। हालांकि आपके घर वालो को इसक कोई नोटिस अलग से नहीं जाता है।

Step 3- Objection on Court Marriage 

अधिनियम की धारा 4 में सूचीबद्ध अध्याय 2 के आधार पर कोई भी व्यक्ति संबंधित जिले में वैवाहिक प्राधिकरण को विवाह के लिए आपत्ति दर्ज करा सकता है। इसकी प्रमाणिकता की जाँच मैरिज अधिकारी करते हैं।

आपत्ति दर्ज करने की तारीख से 30 दिनों के भीतर वैध अधिकृत व्यक्ति द्वारा जांच की आवश्यकता होती है। यदि आपत्तियां वैध हो जाती हैं तो विवाह एप्लीकेशन रिजेक्ट कर दिया जाता है ।

अगर आपत्ति आती है तो शादी करने वाला जोड़ा 30 दिनों के भीतर अपील दायर कर सकता है। विवाह अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आपके स्थानीय जिला न्यायालय में अपील दायर की जा सकती है।

अगर इन 30 दिनों में कोई आपत्ति नहीं आती है तो court marriage complete माना जाएगा।

Step 4- Approval of Court Marriage 

30 दिनों भीतर अगर कोई आपत्ति नहीं है या आपत्ति नामंजूर हो तो दोनों पक्षों को district magistrate office जाना होता है।

अनुच्छेद 12 के अनुसार आपको मैरिज ऑफिस या किसी पास के स्थान में मैरिज अफसर और गवाहों के सामने शादी की आम रश्म को पूरा करना होता है। और इसी के लिए आपको निर्धारित शुल्क भी जमा करना होगा।

दोनों पक्ष और तीन गवाह विवाह अधिकारी के समक्ष घोषणा पर हस्ताक्षर करेंगे।

विवाह अधिकारी भी कोर्ट मैरिज मंजूरी के लिए आपने दस्तखत करता है। Marriage officer की मंजूरी के बाद आपकी कोर्ट मैरिज मंजूर माना जाता है ।

Step 5- Court Marriage Certificate 

कोर्ट के मैरिज रूल्स के मुताबिक शादी पूरी होने के बाद रजिस्ट्रार सारी डिटेल्स भरकर मैरिज सर्टिफिकेट ( Court Marriage Certificate ) जारी करता है।

इस मैरिज सर्टिफिकेट पर दोनों पक्षों और तीन गवाहों के हस्ताक्षर होते हैं, यह सर्टिफिकेट कोर्ट में शादी का भी निर्णायक सबूत होता है।

शादी का नोटिस प्रकाशित होने के 3 महीने के भीतर शादी नहीं होने पर शादी के लिए फिर से नोटिस जमा करना होता है।

Conclusion

ऊपर दिए इस आर्टिकल में हमने जाना कि भारत में कोर्ट मैरिज करने के लिए कितनी फीस लगती है।

आज के समय में बहुत से युवा शादी के लिए कोर्ट मैरिज को चुनते हैं, क्योंकि इसमें जाति संबंधित या परिवार आदि की नामंजूरी जैसी कोई समस्या नहीं होती।

यदि लड़के-लड़की की उम्र सही है, वे दोनों इच्छुक है और कोर्ट मैरिज के लिए जरूरी सभी नियमों को पूरा करते हैं तो वह बिना किसी समस्या के शादी कर सकते हैं।

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