डॉक्टर बनने के लिए कितना पैसा लगता है?

दोस्तों यहां इस लेख में आज हम चर्चा करेंगे कि डॉक्टर बनने में कितना पैसा लगता है? (doctor banne mein kitna paisa lagta hai), डॉक्टर बनने में कितना खर्च आता है? कोई भी विद्यार्थी जो डॉक्टर बनना चाहता है उसे इसके लिए कितने पैसे खर्च करने होंगे? आदि।

दोस्तों किसी भी विद्यार्थी से स्कूल में या अन्य कहीं पर भी पूछे जाने पर कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता है, एक जवाब काफी विद्यार्थियों द्वारा दिया जाता है जोकि है एक doctor

आज के समय में लाखों-करोड़ों युवा मेडिकल के क्षेत्र में पढ़ाई करके एक अच्छा डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, इसीलिए हर साल NEET और इस जैसी परीक्षा में लाखों विद्यार्थी बैठते हैं।

एक डॉक्टर बनाना समाज में प्रतिष्ठा की भी बात होती है, साथ ही अच्छा डॉक्टर बन जाने पर कमाई की भी कभी दिक्कत नहीं होती, और सबसे ऊपर तो डॉक्टर जिंदगीयां बचाता है।

पर एक डॉक्टर बनना आसान काम नहीं है। सबसे पहले तो, इसका काम इतना जरूरी है कि इसके लिए सही तरीके से पढ़ने और मेहनत करने की जरूरत होती है।

और फिर आता है डॉक्टर बनने के लिए होने वाला खर्च। डॉक्टर बनने के लिए एमबीबीएस जैसे कोर्स की पढ़ाई करना होती है और इसके लिए शिक्षण संस्थान मोटी फीस वसूलते हैं।

एक डॉक्टर बनने के लिए लाखों रुपए तक का खर्च आ सकता है, डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए loan और scholarship जैसे विकल्प भी है, यहां उन सभी के बारे में चर्चा करेंगे।

डॉक्टर बनने में कितना पैसा लगता है?

डॉक्टर बनने के लिए कितना पैसा लगता है?

एक डॉक्टर किसे कहते हैं यह तो हम सब जानते ही हैं, जो व्यक्ति बीमारियों का इलाज करता है वह डॉक्टर होता है। डॉक्टर में भी अलग-अलग प्रकार होते हैं, जैसे जनरल फिजिशियन या किसी विशेष क्षेत्र में स्पेशलिस्ट।

बात करें डॉक्टर बनने में होने वाले खर्च की तो यह मुख्यतः वह रकम होती है जो आप अपने मेडिकल कॉलेज को फीस के तौर पर देते हैं। कोई भी कोर्स करने के लिए हमें  उसकी फीस देनी ही होती है, और मेडिकल की पढ़ाई के लिए भी यही बात है।

डॉक्टर बनने के लिए मुख्यत: लोग एमबीबीएस का ही कोर्स करते हैं, जो कि एक महंगा कोर्स है। डॉक्टर बनने के लिए खर्च की रकम कितनी होगी यह निर्भर करता है कि आप कहां से अपना मेडिकल कोर्स पूरा करते हैं।

मतलब यह है कि आप सरकारी medical कॉलेज से पढ़ाई करते हैं, या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज से।

जाहिर है हर छात्र चाहेगा कि वह कम से कम खर्च में अपने मेडिकल की पढ़ाई पूरी कर ले, पर साथ ही एक अच्छे कॉलेज से पढ़ाई भी जरूरी है ताकि विद्यार्थी सही knowledge ले सके।

दूसरे किसी भी कोर्स की तरह medical course की fees भी सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में अलग-अलग होती है। जाहिर है सरकारी कॉलेज में कम खर्च के साथ आप अपनी medical की पढ़ाई पूरी कर सकते हैं, जबकि एक अच्छे प्राइवेट कॉलेज में आपको काफी ज्यादा फीस देनी पड़ती है।

इसके अलावा management quota और scholarship जैसे options भी हैं। अभी राज्य सरकार और केंद्र सरकार द्वारा बहुत सारी छात्रवृत्ति की योजनाएं शुरू की गई हैं, जिसके जरिए मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे कोर्स के लिए सरकार आपको छात्रवृत्ति देती है।

डॉक्टर की पढ़ाई में कितना पैसा लगता है

1. सरकारी Medical College

हर विद्यार्थी यही चाहेगा कि वह अपने MBBS/medical course की पढ़ाई एक सरकारी कॉलेज से ही पूरा करें। जिसका सबसे obvious कारण है सरकारी कॉलेज की कम फीस।

एक बड़े और नामी प्राइवेट कॉलेज की तुलना में सरकारी कॉलेज से काफी काम खर्च के साथ डॉक्टरी की पढ़ाई पूरी की जा सकती है।

अब इसके लिए exact amount तो नहीं बताया जा सकता, क्योंकि यह अलग-अलग हो सकता है, पर एक औसत तौर पर बात करें तो सरकारी कॉलेज से आप 500000 से लेकर 10 लाख तक की फीस देकर सरकारी कॉलेज से अपना मेडिकल कोर्स पूरा करके एक डॉक्टर बन सकते हैं।

कोर्स के दौरान आपको मेडिकल कॉलेज को सालाना फीस देनी होती है, और कुल मिलाकर fees इतनी तक जाती है।

मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए कुछ बहुत ही सस्ते कॉलेज भी उपलब्ध है, जबकि कुछ सरकारी कॉलेजों में भी फीस इससे थोड़ी ज्यादा हो सकती है।

सबसे अच्छा यही रहता है कि आप कॉलेज में दाखिले से पहले फीस से संबंधित सारी जानकारी प्राप्त कर लें जो आपको कॉलेज से या ऑनलाइन वेबसाइट पर मिल जाती है।

इसके अलावा बहुत सारे सरकारी मेडिकल कॉलेज में छात्रवृत्ति की सुविधा भी प्रदान की जाती है, अगर आप Lower Income Class परिवार  से आते हैं तो आपको छात्रवृत्ति भी प्राप्त हो सकती है जिससे आपकी फीस और भी कम हो जाती है।

एमबीबीएस जैसे कोर्स की पढ़ाई एक सरकारी कॉलेज से करना सबसे अच्छा विकल्प रहता है, कम खर्च के साथ अच्छी पढ़ाई करके आप भविष्य में एक अच्छा डॉक्टर बन सकते हैं।

2. Private Medical college

दोस्तों मध्यम परिवार से belong करने वाले विद्यार्थियों के लिए प्राइवेट कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई कर पाना तो बहुत ही मुश्किल होता है।

यदि आपकी financial condition बहुत अच्छी नहीं है तो प्राइवेट कॉलेज से एमबीबीएस जैसे कोर्स को करना बिल्कुल भी recommended नहीं है।

प्राइवेट कॉलेजों में मेडिकल कोर्स की फीस बहुत ही ज्यादा होती है, जहां सरकारी कॉलेजों में मेडिकल courses की fees कम से कम पांच लाख तक रहती है वहीं प्राइवेट कॉलेजों में यह कम से कम 2500000 तक भी रहती है।

कई प्राइवेट कॉलेजों में तो इतनी रकम सिर्फ 1 साल की फीस की होती है। हो सकता है सुनने में बहुत ज्यादा लगे पर किसी प्राइवेट कॉलेज से डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए आपको 1,00,00,000 रुपए तक भी खर्च करने पड़ सकते हैं।

हालाकि डिग्री में कोई अंतर नहीं होता लेकिन एक प्राइवेट कॉलेज में मेडिकल की पढ़ाई की गुणवत्ता किसी सरकारी कॉलेज की पढ़ाई की गुणवत्ता से बेहतर रहती है।

कई private colleges में मेडिकल कोर्स में दाखिले के लिए आपको एंट्रेंस एग्जाम भी देना होता है, साथ ही कुछ प्राइवेट कॉलेजों में स्कॉलरशिप के लिए भी परीक्षाएं देनी होती है जिसमें आए अंकों के आधार पर आपको फीस में छूट दी जाती है।

पर यह सब चीजें जोड़कर भी प्राइवेट कॉलेज की फीस काफी ज्यादा होती है, जिससे सामान्य विद्यार्थी अफोर्ड नहीं कर सकते। इसीलिए प्राइवेट कॉलेज मुख्यतः उन्हीं के लिए है जिनके पास पैसों की कोई कमी ना हो, और वो अच्छे से पढ़ाई करके डॉक्टर बनना चाहते हों।

3. Management quota

हमने ऊपर सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों की मेडिकल course की फीस के बारे में बात की, इन दोनों में एक और चीज आती है जिसे मैनेजमेंट कोटा कहते हैं।

सभी प्रकार के प्राइवेट कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटा नाम की सुविधा रहती है, प्राइवेट ही नहीं बल्कि सरकारी कॉलेज में भी यह सुविधा उपलब्ध होती है।

मैनेजमेंट कोटा का मतलब है कि किसी मेडिकल कॉलेज में कुछ सीट उस कॉलेज में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए रिजर्व रहता है जिसमें वे कर्मचारी किसी विद्यार्थी का एडमिशन करा सकते हैं।

अगर कॉलेज के कर्मचारी उस सीट में किसी विद्यार्थी का एडमिशन कराते हैं तो उन्हें कुछ प्रतिशत कमीशन के तौर पर दिया जाता है जो की मैनेजमेंट कोटा की फीस से लिया जाता है। 

असल में होता यह है कि किसी स्टूडेंट को NEET की परीक्षा में कम marks मिलने के कारण उसे एक अच्छे Medical College में जगह नही मिलती, ऐसे में उन students  के लिए Management Quota से एडमिशन लेने का विकल्प बचता है।

अगर किसी के पास बहुत पैसा है तो मैनेजमेंट कोटा से एडमिशन ले सकता है, जिसमें उसे सिर्फ डोनेशन के तौर पर 5 से 10 लाख तक देने पड़ते हैं।

Middle class family से belong करने वालों को तो इसकी तरफ देखना ही नहीं चाहिए। जिनकी वाकई में एक अच्छा डॉक्टर बनने की इच्छा होती है, वे अच्छे से और मेहनत के साथ पढ़ाई करते हैं, ताकि उन्हें कक्षा मेडिकल कॉलेज मिल सके और वे डॉक्टर बनकर समाज की सेवा कर सके।

डॉक्टर बनने के लिए क्या योग्यता चाहिए?

डॉक्टर बनने के लिए आपके पास कुछ मिनिमम योग्यताओं का होना जरूरी है। सबसे पहले तो यदि आप डॉक्टर बनना चाहते हैं तो आपको दसवीं के बाद साइंस स्ट्रीम चुनना होगा और उसमें भी बायलॉजी।

Doctor बनने के लिए विद्यार्थी को किसी भी राज्य सैनिक बोर्ड या केंद्रीय शैक्षणिक बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल से physics, chemistry और biology के साथ 12वीं पास करनी है।

Doctor बनने के लिए 12वीं में कम से कम 60% अंक अनिवार्य हैं, तभी आप को किसी अच्छे मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिल सकता है।

डॉक्टर बनने के लिए आपको मेडिकल कोर्स (mbbs) करना होता है।  इस कोर्स में दाखिला मेडिकल प्रवेश परीक्षा के द्वारा ही मिलता है, all India pre medical entrance exam (AIPMT), NEET आदि के बारे में आपने संभवतः सुना होगा।

मेडिकल की प्रवेश परीक्षा हमारे देश में नेशनल लेवल तथा स्टेट लेवल में आयोजित होती है,  आप इनमें से किसी भी प्रवेश परीक्षा को दे सकते हैं जिससे आप किसी भी राज्य के मेडिकल कॉलेज या फिर केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले सकते हैं।

Private colleges में कुछ में मार्क्स के आधार पर, तो कुछ में एंट्रेंस एग्जाम देकर दाखिला होता है। हमारे देश में बहुत सारे मेडिकल कॉलेजेस हैं जिनमें दाखिले लेने के लिए आपको  entrance exam देना  होता है।

अब हम हमारे देश के top medical entrance exam के बारे में जानते हैं, विद्यार्थी  इन परीक्षाओं को देखकर हमारे देश के अच्छे मेडिकल कॉलेजेस में दाखिला ले सकते हैं।

AIIMS, NEET, AFMC, AMU CET, AU ME, BHU PMT, CEE KERALA, CET KARNATAKA, CET PUNJAB, CMC VELLORE, DU MET, GGSIPU CET, GUJ CET, DMER, HPCPMT, MH SSET आदि।

कम पैसे में डॉक्टर कैसे बने?

हमने ऊपर डॉक्टर बनने के लिए होने वाले खर्च की बात की, सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में मेडिकल कोर्स के लिए कितना पैसा लगता है, इस बात का आपको एक औसत आईडिया लग गया होगा।

पर बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होती, वे सरकारी कॉलेज की फीस भी नहीं दे सकते हैं। ऐसे में एक ही सवाल रहता है कि कम से कम खर्च में डॉक्टर कैसे बना जा सकता है।

और mainly इसका जवाब भी यही है कि अच्छे से पढ़ाई के अलावा और कोई दूसरा विकल्प नहीं होता। गरीब परिवार से होने पर अच्छे से पढ़ाई करके एंट्रेंस एग्जाम में अच्छे से अच्छे नंबर लाकर scholarship पाकर कम से कम खर्च में डॉक्टर बनना ही एकमात्र विकल्प है।

आप जितनी मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करेंगे एंट्रेंस एग्जाम आदि में उतना ही अच्छा परफॉर्म करेंगे, जिससे आपको अपने मेडिकल कोर्स के लिए एक अच्छा सरकारी कॉलेज मिलने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

MBBS में कितना खर्चा आता है?

यदि हम एमबीबीएस के कोर्स की बात करें तो MBBS का कोर्स  चार साल का होता है, जिसके बाद  आपको 1.5 साल की  Internship भी करनी पड़ सकती है।

जिससे कि कुल मिलाकर मेडिकल कोर्स 5.5 साल का हो जाता है। अगर आपको मेडिकल कोर्स कम पैसो में करना है,  तो आपको पहले ऑल इंडिया प्री मेडिकल एंट्रेस एग्जाम (एआईपीएमटी) क्वालिफाई करना होगा।

कुछ सबसे सस्ते मेडिकल कॉलेजेस की बात करें तो अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली की फीस – ₹1145 प्रतिवर्ष है

मौलाना आज़ाद मेडिकल कॉलेज (MAMC), नई दिल्ली की फीस – ₹15400  प्रतिवर्ष है

जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज– (JLN), अजमेर की फीस – ₹4900 प्रतिवर्ष है।

इनमें से किसी भी कॉलेज में दाखिला मिल जाने पर आप बहुत ही आसानी से कम खर्च में अपना मेडिकल कोर्स पूरा कर सकेंगे।

डॉक्टर समाज के लिए महत्वपूर्ण  होता है

डॉक्टरी एक ऐसा प्रोफेशन है, जो समाज के लिए बहुत ही जरूरी है। सोचिए यदि डॉक्टर नहीं होंगे तो बीमारियों को ठीक और लोगों को स्वस्थ कौन रखेगा।

सोच कर देखिए कि हमें जीवन में कितनी बार डॉक्टर के पास जाने की जरूरत पड़ती है। बीमारी चाहे छोटी हो या बड़ी उसका इलाज जरूरी है जो बिना डॉक्टर के संभव नहीं।

एक अच्छा डॉक्टर बन जाने पर पैसों की कमी तो नहीं होती और उससे भी जरूरी होती है डॉक्टर की जिम्मेदारी। डॉ समाज का सबसे महत्वपूर्ण अंग है क्योंकि वे जिंदगी बचाने का काम करते हैं।

Doctor उन professions में आता है, जिनका समाज में एक रुतबा और प्रतिष्ठा होती है। एक डॉक्टर को हमेशा इज्जत से देखा जाता है।

समाज में डॉक्टरों को भगवान के रूप में देखा जाता है क्योंकि वे लोगों को मौत से बचाते हैं।

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